हरिद्वार खुद के रक्त, मज्जा और अस्थियों से नवनिर्माण कर जीवन का संचार करने वाली शक्ति का नाम माता है। प्रकृति ने मां को सबसे बड़ा गुरु तथा पिता को संवाहक का दायित्व प्रदान किया है। शिक्षा के माध्यम से गुरु समाज और देश के लिए श्रेष्ठ एवं अनुशासित नागरिकों का निर्माण करता है।
गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय, हरिद्वार के समविश्वविद्यालय ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय शिक्षक दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कुलपति प्रो. प्रतिभा मेहता लूथरा, कुलसचिव प्रो. सत्यदेव निगमालंकार एवं अन्य वरिष्ठ प्रोफेसरों की उपस्थिति में हुआ।
अपने संबोधन में कुलपति प्रो. प्रतिभा मेहता लूथरा ने कहा कि विद्यार्थी अपने चरित्र और कार्यों से स्वयं के साथ-साथ अपनी संस्था को भी सिद्ध करता है। युवाओं को शिक्षा प्राप्त करने के साथ अपनी मातृ संस्था के प्रति भी कृतज्ञता का भाव रखना चाहिए।
कुलसचिव प्रो. सत्यदेव निगमालंकार ने कहा कि क्रांति के बिना जीवन में शांति नहीं आ सकती। शिक्षा-दीक्षा और चरित्र आज के युवाओं की जीवनशैली को सर्वाधिक प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृतज्ञता के बिना छात्र जीवन में मर्यादाओं का पालन संभव नहीं है।
वित्ताधिकारी प्रो. वी.के. सिंह ने विद्यार्थियों को गुरु के सानिध्य में रहकर उत्तम नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया। वहीं, आईक्यूएसी डायरेक्टर प्रो. पंकज मदान ने शिक्षा में हो रहे बदलावों तथा उनसे युवाओं को होने वाले लाभों पर चर्चा की। मुख्य परीक्षा नियंत्रक प्रो. एल.पी. पुरोहित ने उत्तम समाज के निर्माण में गुरु के योगदान पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में पूर्व कुलपति प्रो. प्रभात कुमार, प्रो. नवनीत, प्रो. ब्रह्मदेव, प्रो. राकेश जैन, प्रो. कर्मजीत भाटिया, प्रो. सुरेखा राणा, प्रो. नमिता जोशी, प्रो. सीमा शर्मा, प्रो. मुदिता अग्निहोत्री, प्रो. आभा शुक्ला, प्रो. अंजलि गोयल, डॉ. संगीता मदान, डॉ. रितु अरोड़ा, डॉ. वरिंदर विर्क, डॉ. दीपा गुप्ता, डॉ. रीना वर्मा, डॉ. ऋचा सक्सेना, डॉ. अजय मलिक, डॉ. बिन्दु मलिक एवं डॉ. इन्दु गौतम सहित सभी संकायों के शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. कल्पना सागर एवं डॉ. शिवकुमार चौहान ने किया। धन्यवाद ज्ञापन के पश्चात राष्ट्रगान एवं शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
